बुधवार, 28 जनवरी 2009

ब्रेख्त की एक कविता

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विश्व के साहित्यिक धरोहरों में ब्रेख्त एक मह्त्वपूर्ण नाम है. इस बार तत्सम मे ब्रेख्त की एक कविता…
1940 (6)

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता हैः क्या मैं गणित सीखूँ?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूँ
कि रोटी के दो कौर एक से अधिक होते हैं
यह तुम जान ही लोगे।

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता हैः क्या मैं फ्रांसिसी सीखूँ?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूँ
यह देश नेस्तनाबूद होने को है
और यदि तुम अपने पेट को हाथों से मसलते हुए
कराह भरो, बिना तकलीफ़ के झट समझ लोगे।

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता हैः क्या मैं इतिहास पढूँ?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूँ
अपने सिर को जमीन पर धँसाए रखना सीखो
तब शायद तुम जिन्दा रह सको।

5 टिप्‍पणियां:

Bahadur Patel ने कहा…

मेरा छोटा लड़का मुझसे पूछता हैः क्या मैं गणित सीखूँ?
क्या फायदा है, मैं कहने को होता हूँ
कि रोटी के दो कौर एक से अधिक होते हैं
यह तुम जान ही लोगे।

bahut achchhi aur gahare arth wali kavita padhawane ke liye dhanywaad.

Arun Aditya ने कहा…

अपने सिर को जमीन पर धँसाए रखना सीखो
तब शायद तुम जिन्दा रह सको।
yahi sach hai.
ek achchhi kavita padhvane ke liye shukriya.

saloni ने कहा…

bahut badhiya kavita padhwane ke liye dhanyawad

Krishna Patel ने कहा…

bahut hi umda rachana hai.
shreshth kavita padhwane ke liye dhanyawad.
aapka aabhari.

Yuva ने कहा…

Bahut Khub...!!Sundar Abhivyakti...Badhai !!
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