शनिवार, 8 मई 2010

एक गीत

बहुत दिन हुऐ कि कोई नई पोस्ट नहीँ डाली’ - शिकायत वाजिब है। बीमार था भाई, अब शिकायत दूर किये देता हूँ। कुछ और नहीं इस बार अपना ही एक गीत जो जनवरी 2010 में पाखी में छपा है। बहुत दिनों से यही कुछ मित्रों का भी आग्रह था कि भाई अपना भी कुछ डालिये सो पूरा कर रहा हूँ।

- प्रदीप कांत
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राग बसन्त के छेड़ें
या पतझड़ की कथा गढ़ें
प्रीत तुम्ही समझादो ना
खुशी बुने या व्यथा पढ़ें


पहली
बरखा की बूंदे
चुभती हैं शूलों जैसी
यादें आईं बरबस ही
बचपन की भूलों जैसी

थकी हुई सोचों बतलाओ
अब अपनी क्या सज़ा पढ़ें

चेहरा सुबह का उतरा
रंगत साँझ की पीली हैं
कैसे पोंछेगा चकोर
आँखें चन्दा की गीली हैं

पत्तों के मुखड़ों पर जो
अंकित है जो हवा पढ़ें

- प्रदीप कांत
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छाया: प्रदीप कांत

16 टिप्‍पणियां:

अमिताभ मीत ने कहा…

पहली बरखा की बूंदे
चुभती हैं शूलों जैसी
यादें आईं बरबस ही
बचपन की भूलों जैसी

थकी हुई सोचों बतलाओ
अब अपनी क्या सज़ा पढ़ें

बहुत बढ़िया है !!

kshama ने कहा…

चेहरा सुबह का उतरा
रंगत साँझ की पीली हैं
कैसे पोंछेगा चकोर
आँखें चन्दा की गीली हैं

पत्तों के मुखड़ों पर जो
अंकित है जो हवा पढ़ें
Bade dinon baad aapko dekha blogpe! Sundar rachana..hameshaki tarah..

Maatrudiwas zindagibhar chalta rahe,mubarak ho!

दिलीप ने कहा…

bahut hi sundar geet...achcha laga padhkar...

बोधिसत्व ने कहा…

और गीत पढ़वाइए भाई.....

varsha ने कहा…

थकी हुई सोचों बतलाओ
अब अपनी क्या सज़ा पढ़ें
achchi lagi ye panktiyaan.

बलराम अग्रवाल ने कहा…

चेहरा सुबह का उतरा
रंगत साँझ की पीली हैं
कैसे पोंछेगा चकोर
आँखें चन्दा की गीली हैं

प्रिय भाई, इन पंक्तियों से ही पता चलता है कि कवि बीमारी से उठा है। मन को ईमानदारी से व्यक्त कर पाना ही अच्छी कविता है।
स्वास्थ्यलाभ हेतु शुभकामनाएँ।

सुशीला पुरी ने कहा…

'प्रीत तुम्ही समझा दो न !!!!!!!!

rakeshindore.blogspot.com ने कहा…

next time i will welcome of your verry new geet . always post a new one .so that a prosses of creation will be continue. thanks

अशोक कुमार पाण्डेय ने कहा…

सुन्दर गीत

योगेन्द्र मौदगिल ने कहा…

wahwa...achhi rachna...

sandhyagupta ने कहा…

चेहरा सुबह का उतरा
रंगत साँझ की पीली हैं
कैसे पोंछेगा चकोर
आँखें चन्दा की गीली हैं

Bahut khub likha hai.shubkamnayen.

जयकृष्ण राय तुषार ने कहा…

bahut hi sunder geet.pradeepji badhai

अरुणेश मिश्र ने कहा…

गीत प्रशंसनीय ।

kamal ने कहा…

bhai pradeep bodhisatva kee rachanaoun kee kuch baanagee dene ke liye saahuvad,Bodhisatva naam youn bhi mere one of the favourate philoshpher saint OSHO kee rachanaoun main kafee prayukta hota rahaa hai or fir kavi/rachanakaar Bodhisatva bhi apana naam ke anuroop hee adhunik hindi sahitya ke pramukh naam hain. kamal punetha,indore

sandhyagupta ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.
sandhyagupta ने कहा…

Dubara kaphi din bit gaye kisi nayi post ke bina.